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तकनीक और कानून के समन्वय से सशक्त होगी न्यायिक व्यवस्था, दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर संगोष्ठी आयोजित

दुर्ग, 16 अक्टूबर 2026। न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऑडियो-वीडियो माध्यमों से न्यायिक कार्यवाही के संचालन से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, प्रस्तुतीकरण और उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने तक, आधुनिक तकनीक न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। हालांकि, तकनीकी सुविधाओं का उपयोग विधिक प्रावधानों के अनुरूप करना और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

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इसी उद्देश्य से जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायिक कार्यवाही में तकनीक के उपयोग, संबंधित नियमों के प्रावधानों तथा डिजिटल साक्ष्यों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई।

न्यायिक कार्यवाही में तकनीक के उपयोग पर हुई विस्तृत चर्चा

संगोष्ठी में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की जानकारी दी। वहीं, कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन ने प्रस्तुत किया।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का प्रभावी उपयोग न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुलभ और व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही साक्ष्यों की प्रामाणिकता, प्रक्रिया की पारदर्शिता और सभी संबंधित पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधिक नियमों का पालन अनिवार्य है।

ई-साक्ष्य प्रदर्शनी के जरिए डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया की जानकारी

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सहयोग से आयोजित ई-साक्ष्य प्रक्रिया और डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी के माध्यम से डिजिटल साक्ष्यों के महत्व, उनकी प्रक्रिया तथा न्यायिक कार्यवाही में उनकी उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई।

संगोष्ठी में जहां ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के विधिक प्रावधानों और उनके व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई, वहीं प्रदर्शनी ने तकनीकी विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान किया। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों को डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका से परिचित कराना तथा तकनीक आधारित न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

रंगोली के माध्यम से रचनात्मक प्रस्तुति

विधिक संगोष्ठी के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की ओर से आकर्षक रंगोली का निर्माण भी कराया गया। इस कलात्मक प्रस्तुति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। विधिक जागरूकता, डिजिटल तकनीक और पारंपरिक कला के इस समन्वय ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।

विभिन्न विभागों की सहभागिता ने दिया समन्वय का संदेश

कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों के साथ उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ की आवश्यकता को रेखांकित किया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष और संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ तथा ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से न्यायिक कार्यवाही के संचालन से जुड़े विधिक एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देना था।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन न्याय की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उसका उपयोग निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक है।



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