रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में हवा की रफ्तार 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। वहीं, कुछ स्थानों पर 200 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए बस्तर संभाग के चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रायपुर सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने संभावित आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
इन चार जिलों में रेड अलर्ट
मौसम संबंधी चेतावनी के अनुसार, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा जताया गया है। वहीं, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी सहित कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।चक्रवात का प्रभाव बढ़ने पर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम खराब हो सकता है। 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश का ज्यादा असर रहने की संभावना है, जबकि 29 अक्टूबर को उत्तर और उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में इसका प्रभाव बढ़ सकता है।
दंतेवाड़ा में स्कूलों की छुट्टी, किसानों को सलाह
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए दंतेवाड़ा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी मौसम आधारित सलाह के अनुसार, किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बारिश के कारण फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था
संभावित बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं। संवेदनशील इलाकों में कुल 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं। इन शिविरों में करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
योजना के तहत 12 संवेदनशील जिलों में 341 और अन्य जिलों में 438 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, बिजली और दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।प्रशासन को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
SDRF और NDRF की टीमें रहेंगी तैयार
संभावित आपदा से निपटने के लिए राज्य में SDRF की सात टीमें तैयार की गई हैं। प्रत्येक टीम में 36 जवान हैं। इनकी तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है।इसके अलावा दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी NDRF की टीमें तैनात करने की तैयारी की गई है।बचाव कार्यों के लिए नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवानों और 3,895 आपदा मित्रों को भी तैनात किया जा रहा है। SDRF के पास पानी में बचाव कार्यों के लिए रबर बोट, हाइड्रोलिक कटर और पानी के अंदर देखने वाले कैमरों सहित विभिन्न उपकरण उपलब्ध हैं।
अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश
मौसम खराब होने और संभावित आपदा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील जिलों के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध रखने की व्यवस्था की जा रही है।प्रशासन ने पशुओं की देखभाल और जरूरत पड़ने पर टीकाकरण की व्यवस्था करने को भी कहा है। आपदा के दौरान घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी
आपदा की स्थिति में लोगों की सहायता के लिए राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेगा। प्रभावित लोग टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।प्रशासन नदियों के जलस्तर पर भी नजर रख रहा है। इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के अलावा बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। बांधों से पानी छोड़ने की संभावना होने पर प्रशासन को पहले से सूचना देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू की तैयारी
यदि भारी बारिश के कारण गांवों में जलभराव होता है या लोग बाढ़ में फंस जाते हैं, तो जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर की मदद से बचाव अभियान चलाया जा सकता है। इसके लिए रायपुर और बस्तर में उपलब्ध हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है।नदी, नालों, पुल-पुलियों और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा होने की स्थिति में आवाजाही रोकने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
तूफान के बाद नुकसान का आकलन भी होगा
सरकार ने चक्रवात का प्रभाव समाप्त होने के बाद संभावित नुकसान का सर्वे करने की तैयारी भी की है। संबंधित विभागों को मकानों, फसलों, पशुओं, सड़कों, पुल-पुलियों और बिजली व दूरसंचार सेवाओं को हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच, साफ-सफाई और बीमारियों की रोकथाम के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत कर सेवाओं को जल्द बहाल करने पर जोर दिया गया है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।
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