दुर्ग, 04 नवम्बर 2026। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी की अध्यक्षता में बुधवार को क्षेत्रीय कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान, रूआबांधा में कृषि एवं संबद्ध विभागों की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में खरीफ वर्ष 2026 के दौरान कृषि गतिविधियों एवं विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ रबी वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ दलहन, तिलहन, मिलेट्स एवं उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को किसानों को धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान दिए जाने के प्रावधान की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाने को कहा। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन, कुक्कुटपालन, बकरीपालन एवं मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में खरीफ सीजन की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए श्री परदेशी ने कहा कि प्रदेश में खरीफ के दौरान बेहतर कार्य हुआ है और दुर्ग संभाग के जिलों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा है। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में भी सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें, ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने बीज, उर्वरक एवं अन्य कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता तथा उनके सुचारू वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
फसल विविधीकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्ग संभाग में कृषि विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए दलहन, तिलहन, प्राकृतिक खेती एवं उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के लिए प्रमाणित एवं उन्नत बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा करते हुए उन्होंने योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा दलहन, तिलहन एवं मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा। उद्यानिकी विभाग को फसलों का क्षेत्र विस्तार करने और ऑयल पाम के साथ मिश्रित खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए।
पशुधन विकास विभाग की समीक्षा के दौरान केंद्र एवं राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली गई। इसमें कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, पशुओं के टीकाकरण, गौशाला संचालन एवं गौधाम योजना की प्रगति शामिल रही। कृषि उत्पादन आयुक्त ने पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्यपालकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास करने को कहा।
संभागायुक्त श्री सत्यनारायण राठौर ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए कृषि नवाचारों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि दुर्ग संभाग कृषि उत्पादन के साथ पशुपालन, कुक्कुटपालन, मत्स्यपालन एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इन गतिविधियों से किसानों की आमदनी में वृद्धि हो रही है। उन्होंने परंपरागत कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही।
बैठक में कृषि यंत्रीकरण सबमिशन की समीक्षा करते हुए श्री परदेशी ने कहा कि शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद बुआई एवं कटाई के समय हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आने वाली मशीनों पर निर्भरता दिखाई देती है। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए कृषि यंत्र प्राप्त करने वाले किसानों को उनके संचालन, रखरखाव एवं उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। इससे उपलब्ध मशीनों का बेहतर उपयोग होगा और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी।
निजी कृषि आदान विक्रय केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुछ विक्रेताओं द्वारा किसानों को प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज एवं कीटनाशक के साथ अन्य अमानक उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें मिल रही हैं। इस तरह की फोर्स टैगिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए। बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचने तथा अमानक बीज एवं कृषि आदान का विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा के दौरान निर्धारित फसलों की खरीदी एवं किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में अधिकारियों ने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इससे पारंपरिक ठोस उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति मिल रही है। साथ ही बीज उत्पादन एवं भंडारण की स्थिति संतोषजनक होने तथा किसानों को बीज निगम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया गया।
बैठक में पीपीटी के माध्यम से खरीफ 2026 में फसलवार क्षेत्राच्छादन, फसल विविधीकरण तथा रबी के पड़ती क्षेत्र में अतिरिक्त रकबा विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। ग्रीष्मकालीन धान का रकबा शून्य करने, पीएम-आशा के अंतर्गत चयनित उपार्जन केंद्रों के कैचमेंट क्षेत्रों में विभिन्न फसलों की संभावित आवक तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कृषि, सहकारिता एवं अन्य संबद्ध विभागों की योजनाओं के लक्ष्य, उपलब्धियां और चुनौतियों की समीक्षा की गई।
मत्स्यपालन विभाग की समीक्षा में राज्य शासन की योजनाओं एवं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड, नेशनल फिशरमेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीयन, अमृत सरोवरों को मत्स्यपालन से जोड़ने तथा इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। पशुधन विकास विभाग के अंतर्गत एलएसडी एवं पीपीआर टीकाकरण, दुग्ध सहकारी समितियों का गठन, दुधारू पशु वितरण, गौधाम एवं गौशाला संचालन, मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट तथा पशु चिकित्सालयों के भवन निर्माण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव, पशु चिकित्सा सेवाएं के संचालक श्री चंद्रकांत वर्मा, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी के संचालक श्री लोकेश कुमार, मत्स्यपालन विभाग के संचालक श्री नारायण सिंह नाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा मार्कफेड, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम, मंडी बोर्ड एवं अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों ने पीपीटी के माध्यम से अपने-अपने जिलों की उपलब्धियों, कार्ययोजनाओं और चुनौतियों का प्रस्तुतिकरण किया।
उल्लेखनीय है कि कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों में क्रमवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की जमीनी प्रगति का आकलन करना, क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान करना तथा शासन की योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचाना है। इसी क्रम में दुर्ग संभाग की यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
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