रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब कारोबार से कथित तौर पर जुटाई गई 860 से 880 करोड़ रुपये तक की नकदी कांग्रेस के रायपुर स्थित कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। इस मामले में कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ED ने रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन दोनों संपत्तियों की अनुमानित कीमत 9 करोड़ 6 लाख रुपये बताई गई है। एजेंसी की कार्रवाई के बाद शराब घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन और कथित लाभार्थियों को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ अदालत में शिकायत
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 8 अक्टूबर को दोनों संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया था। इसके अगले दिन यानी 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत पेश की गई।रामगोपाल अग्रवाल को इस मामले में 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। ED का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कैसे पहुंचती थी करोड़ों रुपये की नकदी?
ED की जांच में दावा किया गया है कि शराब सिंडिकेट से प्राप्त नकदी के प्रबंधन में लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल की अहम भूमिका थी। एजेंसी के मुताबिक, कथित तौर पर रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर नकदी रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई जाती थी।जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि रामगोपाल अग्रवाल के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र ढढ़सेना को भी इस लेनदेन से जुड़ी रकम सौंपी जाती थी।ED के अनुसार, करीब 860 से 880 करोड़ रुपये इस माध्यम से पहुंचाए गए थे। इनमें से लगभग 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहने का आरोप है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम को कहां रखा गया, किस काम में इस्तेमाल किया गया और किन लोगों के बीच इसका वितरण हुआ।अपने दावों के समर्थन में ED ने डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का उल्लेख किया है।
610 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों पर कार्रवाई
शराब घोटाले की जांच के दौरान ED अब तक 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच, जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई कर चुकी थी। रामगोपाल अग्रवाल की 9.06 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किए जाने के बाद यह कुल आंकड़ा बढ़कर लगभग 610.34 करोड़ रुपये हो गया है।इस मामले में एजेंसी ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में एक मुख्य अभियोजन शिकायत के अलावा छह पूरक शिकायतें भी दाखिल की हैं। जांच के सिलसिले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा किया जाना है।
2,883 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई
ED के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार से जुड़े कथित सिंडिकेट ने 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय अर्जित की।जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान देशी शराब की आपूर्ति, बिना हिसाब वाली शराब की बिक्री, डिस्टिलरी से कमीशन और विदेशी शराब के लाइसेंस से जुड़ी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के जरिए रकम जुटाई गई।एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि शराब कारोबार की सरकारी व्यवस्था और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी CSMCL से जुड़े कामकाज का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया गया।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संबंधित FIR के आधार पर आगे बढ़ी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की।ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच अधिकारियों और कारोबारियों के एक कथित नेटवर्क ने शराब कारोबार में अनियमितताओं के जरिए सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया। जांच में तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के अधिकारी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर समेत कई लोगों की कथित भूमिका की पड़ताल की गई।
फरवरी 2019 में सिंडिकेट बनाने का आरोप
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, कारोबारी अनवर ढेबर ने फरवरी 2019 में रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेंगिंगटन में डिस्टिलरी मालिकों के साथ एक बैठक की थी।बताया गया है कि बैठक में छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए थे। इसके अलावा वेलकम डिस्टिलरी से जुड़े राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल और हीरालाल जायसवाल सहित अन्य लोगों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है।
जांच से जुड़े विवरणों में एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह का नाम भी सामने आया है। ED इस कथित नेटवर्क के कामकाज और इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।अन्य लाभार्थियों की पहचान में जुटी EDप्रवर्तन निदेशालय अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि कथित शराब घोटाले से अर्जित धन किन-किन लोगों तक पहुंचा और इससे किसे आर्थिक लाभ हुआ।रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों को अटैच किए जाने के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। एजेंसी के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में अन्य लोगों की भूमिका तथा वित्तीय लेनदेन को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।महत्वपूर्ण बात: इस पूरे मामले में ऊपर दी गई जानकारी ED के दावों और जांच से संबंधित विवरणों पर आधारित है। आरोपों को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
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