दुर्ग, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद बीते 25 वर्षों में तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार की कृषक हितैषी नीतियों और सिंचाई विकास पर विशेष जोर के चलते संभाग में सिंचाई का रकबा 87,930 हेक्टेयर से बढ़कर 1,13,538 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इस विस्तार से हजारों किसानों को खेती के लिए बेहतर जल सुविधाएं मिली हैं और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है।
जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग लगातार कार्य कर रहा है। सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के साथ नहरों के सुदृढ़ीकरण, जलाशयों के रखरखाव और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से जल वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
राज्य गठन के समय तांदुला जल संसाधन संभाग के अंतर्गत 97 सिंचाई परियोजनाएं संचालित थीं, जिनकी संख्या बढ़कर अब 118 हो गई है। इसी तरह नहरों का कुल विस्तार 1,148 किलोमीटर से बढ़कर 1,349 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इससे सिंचाई जल की पहुंच का दायरा बढ़ा है और कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हुई है।
सिंचाई प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने के लिए नहरों की लाइनिंग, जल संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण और गेट स्वचालन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन उपायों से जल वितरण में सुधार और पानी की बर्बादी को कम करने में मदद मिली है।
दुर्ग-बालोद क्षेत्र में जलापूर्ति और सिंचाई सुविधाओं को विस्तार देने के लिए खरखरा-शिवनाथ नदी पाइपलाइन योजना, जिसकी लागत 1,520 करोड़ रुपये है, तथा 238 करोड़ रुपये की तांदुला ऑगुमेंटेशन सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन प्रयासों से 18,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की गई है।
भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 265 रिचार्ज पिट और 300 सोक पिट का निर्माण भी किया गया है। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन और भू-जल पुनर्भरण को प्रोत्साहित करना है।
तांदुला जल संसाधन संभाग के अंतर्गत सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से 42,000 से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। खेतों तक पानी पहुंचने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा मिली है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिली है। विभागीय जानकारी के अनुसार, सिंचाई सुविधा से फसल उत्पादकता में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं, कृषक जल उपयोगिता समितियों की भागीदारी से जल वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सिंचाई सुविधाओं के बेहतर होने से कृषि आधारित लघु उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के विकास को भी प्रोत्साहन मिला है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
सिंचाई विकास के साथ जल संरक्षण को भी विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। तालाबों, बांधों, परकोलेशन टैंकों और अन्य जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के साथ जलाशयों की डी-सिल्टिंग, मरम्मत और आधुनिकीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य जल संग्रहण क्षमता बढ़ाना और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और जल बजटिंग के माध्यम से पानी की उपलब्धता तथा उसकी जरूरतों के अनुरूप नियोजन पर जोर दिया जा रहा है। जल संरक्षण गतिविधियों में महिला समूहों और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर जनसहयोग को बढ़ावा मिला है।
जल शक्ति अभियान के अंतर्गत पानी बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जन-जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। इन पहलों के माध्यम से लोगों को वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
तांदुला जल संसाधन संभाग में सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीजीपीएस, ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस मैपिंग के माध्यम से सर्वेक्षण कार्यों को अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया गया है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (आरटीएमएस) के जरिए नहरों और जलाशयों की निगरानी को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा ई-ऑफिस और ऑनलाइन प्रोजेक्ट ट्रैकिंग सिस्टम से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
विभाग की ओर से जल संसाधनों के संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। जलाशयों में मत्स्य पालन को प्रोत्साहन और जलीय जैव विविधता के संरक्षण जैसे प्रयास भी जल संसाधनों के बहुउद्देशीय उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
आगामी समय में सिंचाई क्षमता के विस्तार और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित करने, नहरों के आधुनिकीकरण और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही एनीकट को बैराज में बदलने जैसी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
विभाग का लक्ष्य सिंचाई सुविधाओं को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना, उपलब्ध जल संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना और पानी के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है। कृषि के साथ-साथ औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की दीर्घकालिक व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग की पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियां सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और जल प्रबंधन में आए बदलाव को दर्शाती हैं। सिंचाई का रकबा 87,930 हेक्टेयर से बढ़कर 1,13,538 हेक्टेयर होना इस प्रगति का प्रमुख उदाहरण है। आने वाले समय में जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक और किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कृषि समृद्धि तथा जल आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
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