दुर्ग, 26 सितम्बर 2026। विवादों के समाधान के लिए हर मामले को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना जरूरी नहीं है। आपसी बातचीत, सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से भी अनेक विवादों का शांतिपूर्ण निराकरण किया जा सकता है। इसी उद्देश्य को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए मीडिएशन 3.0 के तहत दुर्ग में मीडिएटर अधिवक्ताओं एवं एडवोकेट मीडिएटर्स की विशेष बैठक आयोजित की गई।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के मार्गदर्शन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के सभागार में आयोजित इस बैठक में मध्यस्थता की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक प्रकरणों को मीडिएशन के माध्यम से समाधान तक पहुंचाने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि विवाद को लंबा खींचने के बजाय समय रहते संवाद का रास्ता अपनाया जाए। मध्यस्थता का उद्देश्य केवल किसी प्रकरण का निपटारा करना नहीं, बल्कि पक्षकारों के बीच सहमति के आधार पर ऐसा समाधान तलाशना है, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।
मीडिएशन 3.0 अभियान को तीन अलग-अलग चरणों में संचालित किया जा रहा है। प्रथम चरण में ऐसे मामलों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता के लिए रेफर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दूसरे चरण में पक्षकारों के बीच संवाद एवं समझौते की प्रक्रिया होगी। तीसरे चरण में हुए समझौतों के सत्यापन के साथ प्रकरणों के समापन की कार्रवाई की जाएगी।
मीडिएशन 3.0 के तीन चरण इस प्रकार हैं—
इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य ऐसे विवादों को, जहां मध्यस्थता संभव है, आपसी बातचीत और सहमति के जरिए समाधान की दिशा में ले जाना है। अभियान के दौरान पक्षकारों को मीडिएशन की उपलब्ध सुविधाओं और प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी जा रही है।
मध्यस्थता की प्रक्रिया की विशेषता यह है कि इसमें समाधान किसी एक पक्ष पर थोपा नहीं जाता। दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से अपनी बात रखते हैं और आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल कानूनी विवादों के निराकरण में मदद मिलती है, बल्कि कई मामलों में आपसी संबंधों को बनाए रखने का अवसर भी मिलता है।मध्यस्थता का लाभ लेने के इच्छुक पक्षकार निर्धारित अवधि के दौरान मीडिएशन सेंटर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग अथवा संबंधित न्यायालय से संपर्क कर सकते हैं।
मीडिएशन 3.0 को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को यह बताया जा रहा है कि प्रत्येक विवाद का समाधान केवल लंबी कानूनी लड़ाई के माध्यम से ही नहीं, बल्कि उचित समय पर किए गए संवाद और मध्यस्थता के जरिए भी संभव है।
मध्यस्थता की इस सोच को सरल शब्दों में कहा जाए तो—“Argument से पहले Conversation और Conflict से पहले Mediation।”
मीडिएशन 3.0 इसी संवाद आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए लोगों को विवाद के स्थान पर समाधान की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। दुर्ग में संचालित यह पहल न्याय की उस अवधारणा को आगे बढ़ा रही है, जिसमें फैसला मिलने के साथ-साथ पक्षकारों को आपसी सहमति से समाधान तलाशने का अवसर भी दिया जाता है।
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